नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुचर्चित को-लोकेशन घोटाले में दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व NSE प्रबंध निदेशक एवं CEO चित्रा रामकृष्ण सहित 44 आरोपियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 18 और 20 मई 2026 को पेश होने के लिए समन जारी किए हैं।
विशेष न्यायाधीश एम.पी. सिंह ने 300 से अधिक पन्नों की पूरक चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि कई स्टॉक ब्रोकरों, कंपनी निदेशकों, ट्रेडिंग संस्थाओं और पूर्व NSE अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। CBI के अनुसार, वर्ष 2010 से 2014 के बीच कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को NSE के को-लोकेशन सर्वरों तक विशेष और अनुचित पहुंच दी गई, जिससे उन्हें हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में अन्य निवेशकों की तुलना में तेज डेटा एक्सेस और स्पीड एडवांटेज मिला।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ ब्रोकर बार-बार NSE के तथाकथित “सेकेंडरी सर्वर” से कनेक्ट होते थे, जिसके कारण उन्हें मार्केट डेटा पहले प्राप्त होता था। इससे वे बाजार में अन्य प्रतिभागियों से पहले ट्रेड कर पाते थे और करोड़ों रुपये का कथित अवैध लाभ अर्जित करते थे। CBI का कहना है कि इस प्रक्रिया ने बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
चार्जशीट में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विभिन्न कंपनियों द्वारा अर्जित कथित अवैध लाभ का विवरण भी दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार टॉवर रिसर्च कैपिटल मार्केट्स इंडिया को लगभग ₹182.26 करोड़, SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज को ₹137.33 करोड़, OPG सिक्योरिटीज को ₹132.67 करोड़, PRB सिक्योरिटीज को ₹120.22 करोड़ और PACE स्टॉक ब्रोकिंग सर्विसेज को ₹114.71 करोड़ का कथित अनुचित लाभ मिला। इसके अलावा कई अन्य ब्रोकरेज फर्मों और ट्रेडिंग कंपनियों के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।
CBI ने पूर्व NSE प्रमुख चित्रा रामकृष्ण पर आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल के दौरान को-लोकेशन सिस्टम में लोड बैलेंसर और रैंडमाइजर जैसे जरूरी सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, जबकि सिस्टम की कमजोरियों की जानकारी पहले से थी। एजेंसी का दावा है कि इन सुरक्षा खामियों के कारण कुछ ट्रेडिंग सदस्यों को बार-बार अनुचित लाभ उठाने का अवसर मिला।
मामले में पूर्व NSE अधिकारी महेश एम. सोपारकर और देव प्रसाद सिंह को भी समन जारी किया गया है। CBI के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने सर्वर एक्सेस में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और चेतावनियों के बावजूद कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए।
चार्जशीट में SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज, टॉवर रिसर्च कैपिटल मार्केट्स इंडिया, PRB सिक्योरिटीज, क्वाडआई सिक्योरिटीज, शेयर इंडिया सिक्योरिटीज और मारवाड़ी शेयर्स एंड फाइनेंस सहित कई प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों के नाम शामिल हैं। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत समन किया गया है। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
हालांकि, CBI ने अदालत को यह भी बताया कि जांच के दौरान कुछ आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। इनमें हवाला लेनदेन, OPG सिक्योरिटीज से जुड़ी कथित अवैध विदेशी ट्रेडिंग और “चाणक्य” सॉफ्टवेयर के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोप शामिल हैं।