प्रेम, सेवा और मानवता के दिव्य संदेश को याद करेगा विश्वभर का निरंकारी परिवार
- अनिल
मानवता, प्रेम, विनम्रता और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की पावन स्मृति को समर्पित ‘समर्पण दिवस’ का भव्य एवं भावपूर्ण आयोजन , 13 मई 2026 को संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में आयोजित किया जाएगा। यह विशेष आध्यात्मिक समागम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं श्रद्धेय निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में सायं 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक सम्पन्न होगा, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, भक्तगण एवं मानवता प्रेमी श्रद्धा और भक्ति के साथ सहभागिता करेंगे।

समागम के उपरांत श्रद्धालु सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दिव्य आशीर्वचनों का श्रवण करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण संत निरंकारी मिशन की अधिकृत वेबसाइट एवं डिजिटल माध्यमों पर किया जाएगा, जिससे विश्वभर में बसे लाखों श्रद्धालु इस आध्यात्मिक आयोजन से जुड़ सकेंगे।
बाबा हरदेव सिंह जी केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए आत्मिक शांति, प्रेम और करुणा के जीवंत प्रतीक थे। उनकी सहज मुस्कान, विनम्र व्यक्तित्व और प्रेरणादायी वाणी ने अनगिनत लोगों के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने मानवता को आत्मज्ञान का संदेश देते हुए सिखाया कि सच्चा जीवन वही है, जो प्रेम, सेवा, सहअस्तित्व और समर्पण से परिपूर्ण हो।
उनके नेतृत्व में संत निरंकारी मिशन ने आध्यात्मिकता को केवल उपदेशों तक सीमित न रखते हुए उसे समाज सेवा से जोड़ा। रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और युवा जागरण जैसे अनेक सेवा कार्यों के माध्यम से मिशन ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। बाबा जी का मानना था कि ईश्वर की सच्ची भक्ति मानव सेवा के माध्यम से ही सार्थक होती है।
लगभग 36 वर्षों तक मिशन का नेतृत्व करते हुए बाबा हरदेव सिंह जी ने संत निरंकारी मिशन को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। आज मिशन 67 से अधिक देशों में आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों और विश्व बंधुत्व का संदेश पहुँचा रहा है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण के कारण मिशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट सम्मान प्राप्त हुआ तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सामाजिक एवं आर्थिक परिषद में सलाहकार के रूप में प्रतिष्ठा मिली।
“एकत्व में सद्भाव”, “वसुधैव कुटुम्बकम” और “एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ” जैसे उनके दिव्य संदेश आज भी विश्वभर में प्रेम और एकता की प्रेरणा बनकर गूंज रहे हैं। उनका “दीवार रहित संसार” का सपना आज भी मानवता को जाति, धर्म, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर विश्व बंधुत्व की भावना अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रेम, सेवा, संयम और नैतिक मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचा रही हैं। उनके करुणामयी मार्गदर्शन में संत निरंकारी मिशन निरंतर मानवता को आत्मबोध और विश्व शांति की दिशा में प्रेरित कर रहा है।
‘समर्पण दिवस’ केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उस दिव्य जीवन-दर्शन को आत्मसात करने का पावन पर्व है, जिसने मानवता को प्रेम, सेवा, विनम्रता और समर्पण का मार्ग दिखाया। यह दिवस हर हृदय को यह संदेश देता है कि महान आत्माएँ अपने आदर्शों, विचारों और कर्मों के माध्यम से सदैव अमर रहती हैं तथा युगों तक समाज का पथ आलोकित करती रहती हैं।