- मुनीश कुमार
नई दिल्ली। जिज्ञासा ने अपने 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर संविधान क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग स्थित स्पीकर हॉल में “भारतीय विधिक व्यवस्था : एक समीक्षा” विषय पर एक विचारोत्तेजक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में देश की न्याय व्यवस्था से जुड़ी समकालीन चुनौतियों, न्यायिक सुधारों तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय हरित अधिकरण माननीय न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल रहे, जबकि भारत के अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणि ने अध्यक्षता की। मंच पर जिज्ञासा के अध्यक्ष श्री राज कुमार भाटिया, सचिव श्री सतीश मिनोचा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच संचालन श्री राकेश पाण्डेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्टी श्री मुनीश कुमार गौड़ ने प्रस्तुत किया।

अपने स्वागत संबोधन में श्री राज कुमार भाटिया ने जिज्ञासा की दस वर्षीय यात्रा और सामाजिक एवं संवैधानिक विषयों पर संस्था द्वारा किए जा रहे बौद्धिक संवादों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा निरंतर सार्थक विमर्श के माध्यम से समाज में जागरूकता और चिंतन को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है।
वक्ताओं ने भारतीय न्याय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखते हुए न्यायिक जवाबदेही, मामलों के निस्तारण में विलंब, लंबित मामलों की बढ़ती संख्या, न्याय की सुलभता, विधिक जागरूकता, पुलिस सुधार तथा वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। देशभर की अदालतों में लंबित लगभग 5.4 करोड़ मामलों की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए न्यायिक एवं संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सस्ता, सुलभ और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। वक्ताओं ने समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण और विधिक साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल श्री जगदीश मुखी, प्रख्यात चिंतक श्री के.एन. गोविंदाचार्य, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं जेएनयू के प्राध्यापक, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, उद्योगपति, वरिष्ठ पत्रकार तथा अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने न्यायिक सुधार, नैतिक विधिक आचरण, संस्थागत जवाबदेही तथा राष्ट्र निर्माण में विधि व्यवसायियों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। जिज्ञासा ने सभी वक्ताओं, अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।