ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र के एकीकृत समाधान पर रहेगा विशेष फोकस
बेस्ट क्योर फाउंडेशन (BCF) और किटसॉल्ट एनर्जी (KE) ने भारत में दो महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की है। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व संस्था के अध्यक्ष एवं संस्थापक डॉ. कृष्णन सुथंथिरन करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऊर्जा, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवा और जीवनशैली से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली स्थित नेशनल प्रेस क्लब में आयोजित की गई, जबकि दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस 25 मई 2026 को तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ज़ोन बाय पार्क होटल में आयोजित होगी। डॉ. कृष्णन सुथंथिरन ने अपनी विस्तृत प्रस्तुति में ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से 2026 के बीच भारत सरकार के समक्ष ऊर्जा एवं पर्यावरण से संबंधित कई समाधान प्रस्तुत किए गए हैं।उन्होंने कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में विकसित की जा रही किटसॉल्ट पोर्ट एवं टर्मिनल परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना के माध्यम से एशियाई देशों, विशेषकर भारत, तक ऊर्जा और अन्य संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्लोबल बेस्ट क्योर फाउंडेशन इंडिया द्वारा संचालित “बेस्ट क्योर प्रो हेल्थ एंड मेडिकल सेंटर्स” की भी जानकारी दी गई, जहां कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के निदान एवं उपचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त “बेस्ट लाइफस्टाइल्स” पहल के अंतर्गत प्राकृतिक एवं निवारक उपायों के माध्यम से गंभीर बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
आयोजकों के अनुसार, इन प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य मीडिया, नीति-निर्माताओं और विभिन्न हितधारकों को सतत ऊर्जा विकास, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वस्थ जीवनशैली के एकीकृत मॉडल से अवगत कराना है।
किटसॉल्ट एनर्जी पिछले 13 वर्षों से एक बड़े ऊर्जा अवसंरचना प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरणीय एवं आर्थिक लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करना है। परियोजना के अंतर्गत कनाडा के उत्तरी मैनिटोबा स्थित पोर्ट चर्चिल को पश्चिमी तट पर स्थित किटसॉल्ट पोर्ट से जोड़ने की योजना है। इसके लिए दोहरी पाइपलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसके माध्यम से प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, प्रोपेन, ब्यूटेन, पोटाश, यूरेनियम तथा कृषि उत्पाद जैसे संसाधनों को कनाडा से भारत तक पहुंचाया जा सकेगा। आयोजकों का मानना है कि यह एकीकृत अवसंरचना मॉडल भारत की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरणीय चुनौतियों के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।