भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों के साथ खुलेआम आर्थिक अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि “खरीद केंद्र तक बिक रहे हैं” और भ्रष्टाचार का सीधा बोझ किसानों पर डाला जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक लगभग 69.2 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जबकि 1 करोड़ टन से अधिक खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गेहूं खरीदी में उपयोग होने वाले जूट बैग का वास्तविक वजन लगभग 660 ग्राम तथा प्लास्टिक बैग का वजन करीब 200 ग्राम होता है।
लेकिन आरोप है कि कई खरीद केंद्रों पर जूट बैग के नाम पर 1 किलो तथा प्लास्टिक बैग के नाम पर 300 ग्राम तक गेहूं काटा जा रहा है। यानी प्रति 100 किलो गेहूं पर लगभग 600 ग्राम अतिरिक्त कटौती की जा रही है, जिसकी कीमत करीब 15 रुपये बैठती है।
रघु ठाकुर के अनुसार इस अनियमितता के कारण अब तक किसानों से लगभग 103 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कटौती की जा चुकी है और यदि लक्ष्य के अनुसार खरीद पूरी हुई तो यह राशि 150 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ खरीद केंद्र संचालकों ने स्वयं स्वीकार किया है कि केंद्र प्राप्त करने के लिए उन्हें लगभग 1 लाख रुपये तक रिश्वत देनी पड़ी। ऐसे में उसकी भरपाई किसानों से अवैध कटौती के माध्यम से की जा रही है।
रघु ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरकारी खरीद केंद्रों की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों के गेहूं के वजन से तय मानक के अनुसार केवल 630 ग्राम प्रति बोरी की कटौती की जाए तथा अतिरिक्त काटी गई राशि तत्काल ऑनलाइन किसान के खाते में जमा कर उसकी पावती किसान को दी जाए।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो किसानों का सरकार और खरीद प्रणाली से विश्वास उठ जाएगा।