
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ जेएनयू (AAJ) के हालिया चुनाव परिणामों ने देशभर के शिक्षाविदों, पूर्व छात्रों और बौद्धिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। चुनाव में ‘विश्व’ (ViSHVa) पैनल ने शानदार सफलता हासिल करते हुए चारों शीर्ष पदों पर निर्णायक विजय दर्ज की है। इसे जेएनयू की लोकतांत्रिक परंपरा, बौद्धिक चेतना और संस्थागत विकास के पक्ष में एक मजबूत जनादेश माना जा रहा है।
नवनिर्वाचित नेतृत्व ऐसे समय में संगठन की कमान संभाल रहा है, जब जेएनयू के 80,000 से अधिक पूर्व छात्रों का वैश्विक नेटवर्क शिक्षा, नीति निर्माण, प्रशासन, पत्रकारिता, उद्योग और सामाजिक नेतृत्व के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रतिष्ठित नेटवर्क में नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी, अनेक देशों के शीर्ष नीति-निर्माता, केंद्रीय मंत्री, शिक्षाविद, पत्रकार और वरिष्ठ प्रशासक शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर संपन्न ऑनलाइन मतदान प्रक्रिया के बाद घोषित परिणामों में डी.पी. वाजपेयी अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, सामाजिक उद्यमी और डीआईएएस इंडिया ग्रुप के निदेशक हैं। हिमांशु शेखर उपाध्यक्ष चुने गए हैं, जो मीडिया जगत की एक चर्चित और सम्मानित हस्ती हैं। डॉ. संदेशा रायपा महासचिव निर्वाचित हुई हैं, जबकि डॉ. दर्शनी प्रिय संयुक्त सचिव चुनी गई हैं। कोषाध्यक्ष पद पर डॉ. एन. विजय कुमार को निर्वाचित किया गया है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के सम्मानित शिक्षाविद हैं।
इसके अतिरिक्त डॉ. हरीश चन्द्र, डॉ. मेदिनी प्रसाद राय, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. अजय कुमार, इरफान अहमद तथा शीतांशु धर द्विवेदी सहित सात सदस्य कार्यकारिणी में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने चुनाव में मिले व्यापक समर्थन के लिए विश्वभर में फैले जेएनयू के पूर्व छात्रों का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि यह जीत केवल एक पैनल की सफलता नहीं, बल्कि जेएनयू की उस मूल भावना की विजय है जो ज्ञान, संवाद, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।
नई कार्यकारिणी ने संगठन में पारदर्शिता, सहभागिता और संस्थागत मजबूती को प्राथमिकता देने का संकल्प व्यक्त किया है। साथ ही पूर्व छात्रों के वैश्विक नेटवर्क को और अधिक सक्रिय बनाकर शिक्षा, शोध, सामाजिक विकास और युवा नेतृत्व को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
जेएनयू एलुमनाई एसोसिएशन के इस चुनाव परिणाम को विश्वविद्यालय की समृद्ध बौद्धिक विरासत और उसके पूर्व छात्रों की सामूहिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। यह जनादेश न केवल संगठन के लिए बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सकारात्मक, रचनात्मक और समावेशी नेतृत्व की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।