
विवेक शुक्ला
जयपुर की सामाजिक कार्यकर्ता मनन चतुर्वेदी ने अपना जीवन अनाथ, परित्यक्त और जरूरतमंद बच्चों के नाम कर दिया है। उनकी संस्था सुरमन संस्थान आज 127 बच्चों को आश्रय, शिक्षा और परिवार जैसा वातावरण प्रदान कर रही है।
मनन बताती हैं कि एक दिन उन्हें अपनी कार के पास कुछ घंटे का नवजात शिशु मिला। उस बच्चे को गोद में उठाने के साथ ही उन्होंने तय कर लिया कि वे ऐसे बच्चों के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगी। इसी संकल्प से वर्ष 1998 में सुरमन संस्थान की स्थापना हुई। आज यह संस्था अनाथ, शोषण के शिकार और समाज से उपेक्षित बच्चों के लिए आशा का केंद्र बन चुकी है। अब तक 750 से अधिक बच्चों को वे परिवारों से जोड़ चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जन्मी मनन ने जयपुर में शिक्षा प्राप्त की और फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया। 19 वर्ष की आयु में एक अनाथ बच्ची की पीड़ा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। शुरुआती संघर्षों में उन्होंने संस्थान चलाने के लिए अपने गहने तक बेच दिए, लेकिन बच्चों की सेवा का संकल्प नहीं छोड़ा।

मनन के अनुसार उनके पत्रकार पति सुरेन्द्र चतुर्वेदी, परिवार और शुभचिंतकों का उन्हें लगातार सहयोग मिला। उनके संस्थान से जुड़े कई बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और आत्मनिर्भर नागरिक बन चुके हैं।
सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के कारण वे राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। बाल श्रम, बाल तस्करी, शिक्षा और बाल संरक्षण जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार काम किया है। उन्हें वीर सावरकर पुरस्कार और प्रो. यशवंतराव केलकर यूथ अवॉर्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
सामाजिक कार्यों के साथ-साथ मनन एक प्रतिभाशाली पेंटर भी हैं। उनका कहना है, “मैं कपड़ों को रंगने की बजाय बच्चों की आंखों में रंग भरना चाहती हूं।” संस्थान के लिए संसाधन जुटाने हेतु वे 72 घंटे की नॉन-स्टॉप पेंटिंग का रिकॉर्ड भी बना चुकी हैं।
अब 30 जून और 1 जुलाई को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित पालिका बाजार (गेट नंबर 6-7) पर वे 24 घंटे लगातार पेंटिंग करेंगी। इस दौरान बनाई गई पेंटिंग्स की बिक्री से प्राप्त राशि सुरमन संस्थान के बच्चों की शिक्षा, पोषण और अन्य परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
सुरमन संस्थान की पालना, तपस्या, जीवन, कन्यादान और कोशिश जैसी परियोजनाएं बच्चों और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। लेखिका, वक्ता और युवा मेंटर के रूप में भी मनन चतुर्वेदी समाज को प्रेरित कर रही हैं।
मनन चतुर्वेदी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का समर्पण सैकड़ों जीवन बदल सकता है। उनकी ममता और सेवा ने अनेक बच्चों को नया भविष्य दिया है, जबकि उनकी कला उम्मीद और संवेदना का संदेश फैलाती है।