राष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन माय होम इंडिया द्वारा हूल दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संथाल विद्रोह के महानायक सिद्धो-कान्हू मुर्मू, चाँद-भैरव तथा फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के जनजातीय सशक्तिकरण, जनभागीदारी, ग्रामीण विकास और नक्सल-मुक्त भारत के संकल्प पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, राँची की मेयर रोशनी खाल्खो, माय होम इंडिया के संस्थापक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील देवधर सहित अनेक सामाजिक, राजनीतिक और जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
हूल दिवस 1855 के ऐतिहासिक संथाल हूल (विद्रोह) की स्मृति में मनाया जाता है, जब सिद्धो और कान्हू मुर्मू ने अपने साथियों चाँद, भैरव, फूलो और झानो के साथ ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन तथा शोषणकारी जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका था। उनका अदम्य साहस और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय नायकों के साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने समावेशी विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि जनजातीय समुदाय विकास यात्रा में समान भागीदार बनें।
उन्होंने कहा, “सिद्धो-कान्हू जैसे आदिवासी नायकों की विरासत हमें न्याय, सम्मान और आत्मसम्मान के मूल्यों की याद दिलाती है। उनकी प्रेरणा आज भी राष्ट्र निर्माण की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करती है।”

माय होम इंडिया के संस्थापक सुनील देवधर ने कहा कि हूल दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि विकास और जनभागीदारी की उस यात्रा को भी समझने का अवसर है, जिसने पिछले बारह वर्षों में देश के दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों तक विकास पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय जिलों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है।
उन्होंने माय होम इंडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह कार्यक्रम संथाल हूल के वीरों के साहस और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ पिछले बारह वर्षों में देश में हुए सकारात्मक परिवर्तनों का मूल्यांकन करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण, समावेशी विकास और जनभागीदारी पर सरकार का विशेष ध्यान विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान कर रहा है।
राँची की मेयर रोशनी खाल्खो ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय समाज के उन वीर योद्धाओं को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष कर इतिहास रचा। उन्होंने माय होम इंडिया की सराहना करते हुए कहा कि संगठन नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में जल जीवन मिशन, जनजातीय कल्याण योजनाओं, ग्रामीण अवसंरचना विकास, वित्तीय समावेशन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नक्सल-मुक्त भारत के लिए किए गए प्रयासों सहित मोदी सरकार की विभिन्न उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान सिद्धो-कान्हू, चाँद-भैरव और फूलो-झानो को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया गया।
माय होम इंडिया : राष्ट्रीय एकता का सेतु
वर्ष 2005 में स्थापित माय होम इंडिया एक राष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन है, जो विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत, जनजातीय क्षेत्रों, वनवासी समुदायों और सीमावर्ती इलाकों के युवाओं एवं छात्रों के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। संगठन उत्तर-पूर्व और देश के अन्य हिस्सों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और भावनात्मक सेतु का कार्य करता है।
संगठन की प्रमुख पहल ‘सपनों से अपनों तक’ के माध्यम से अब तक 3,800 से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से पुनः मिलाया जा चुका है। वहीं ‘राष्ट्रवाद पर मंथन’ कार्यक्रम युवाओं में जिम्मेदार, सकारात्मक और समावेशी राष्ट्रवाद की भावना विकसित करने का कार्य कर रहा है।
माय होम इंडिया की उत्तर-पूर्व हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक पाँच लाख से अधिक लोगों को सुरक्षा, कानूनी सहायता और चिकित्सा आपात स्थितियों में मदद प्रदान की जा चुकी है। संगठन महानगरों में अध्ययनरत उत्तर-पूर्वी छात्रों को भी निरंतर सहयोग उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
संगठन द्वारा आयोजित एनईस्ट फेस्ट, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम तथा विभिन्न राष्ट्रीय एकता अभियानों के माध्यम से भारत की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।