नई दिल्ली। लाल किला मैदान स्थित माधव दास बगीची में श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में सोमवार को पुत्रेष्टि यज्ञ से भगवान श्रीराम के जन्म और सुबाहु वध तक के प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। धार्मिक आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत इन दृश्यों ने दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया।
कमेटी के महासचिव धीरजधर गुप्ता, सचिव प्रदीप शरण और प्रवक्ता रवि जैन ने बताया कि रामलीला का शुभारंभ राजा दशरथ और सुमंत के संवाद से हुआ। इसके बाद श्रृंगी ऋषि के आश्रम में पुत्रेष्टि यज्ञ, कौशल्या महल और दशरथ दरबार के दृश्यों का प्रभावशाली मंचन किया गया। यज्ञ के उपरांत भगवान श्रीराम सहित चारों राजकुमारों के जन्म, अयोध्या में उत्सव, प्रजावासियों के गीत-संगीत और नामकरण संस्कार के प्रसंगों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सचिव प्रदीप शरण ने बताया कि अगले प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों द्वारा विघ्न डालने की लीला दिखाई गई। यज्ञ की रक्षा के लिए महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगते हैं। इसके बाद दोनों राजकुमारों के महर्षि के साथ आश्रम प्रस्थान, सुबाहु और मारीच के दरबार तथा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा से जुड़े दृश्यों का मंचन हुआ। लीला के अंतिम चरण में यज्ञ में बाधा डालने वाले राक्षस सुबाहु के वध का सजीव चित्रण किया गया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
प्रवक्ता रवि जैन ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग समाज को मर्यादा, आदर्श, कर्तव्यपालन, सत्य और धर्म की रक्षा की प्रेरणा देते हैं। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने तथा जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया जा रहा है।