नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 14 अक्टूबर को स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को एक रोड रेज मामले और अन्य प्राथमिकियों में गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को स्थायी कर दिया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार उपाध्याय ने अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित गबन और चोरी पर खोजी ऑनलाइन रिपोर्टें लिखी थीं। अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी।
पीठ का आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी अगले नोटिस तक स्थगित रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने 25 अगस्त और 7 सितंबर के अपने अंतरिम आदेशों को स्थायी कर दिया। इन आदेशों में क्रमशः उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा दी गई थी और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने यह भी दर्ज किया कि रोड रेज मामले की प्राथमिकी की प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध करा दी गई है। इसके साथ ही पीठ ने पुलिस द्वारा उपाध्याय को अपने डिजिटल उपकरण जमा कराने के लिए जारी नोटिस पर भी रोक लगा दी।
FIR को चुनौती देने की छूट
रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने स्पष्ट किया कि उपाध्याय रोड रेज मामले की प्राथमिकी को किसी भी आधार पर चुनौती दे सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि उसने इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यानी प्राथमिकी की वैधता पर फैसला आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगा।
पत्रकार का दावा
द हिंदू के अनुसार उपाध्याय ने अदालत में कहा कि रोड रेज का मामला मंदिर के बारे में उनकी ऑनलाइन रिपोर्टों का जवाब देने के लिए ‘गढ़ा गया’ था। अदालत ने उन्हें डिजिटल निजता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिशानिर्देश मांगने वाली एक अलग याचिका दायर करने की छूट दी। इस दावे पर अदालत ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के अनुसार यह मामला अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित दुरुपयोग और चोरी से जुड़ी खबरों से शुरू हुआ, जिन्हें उपाध्याय ने ऑनलाइन प्रकाशित किया था। इसके बाद उनके खिलाफ रोड रेज समेत कई प्राथमिकियां दर्ज हुईं, जिनमें गिरफ्तारी से बचाव के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अगस्त और सितंबर के अंतरिम आदेशों के बाद अब अदालत ने उस सुरक्षा को अगले आदेश तक स्थायी कर दिया है।
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स्रोत: The Hindu। फोटो: Sora Shimazaki / Pexels