तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (25 अक्टूबर 2026) को कहा कि इज़राइल और अमेरिका के साथ युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति में भी उनके देश के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान विदेश मंत्री का यह बयान अमेरिका और इज़राइल की ओर से नए हमलों की बढ़ती धमकियों के बीच आया है।
अराघची ने क्या कहा
तेहरान में एक टेलीविज़न कार्यक्रम के दौरान अराघची ने कहा कि हाल में नए युद्ध की चर्चा हो रही है, पर वे युद्ध के बाद के दौर के बारे में सोच रहे हैं। उनके शब्दों में, युद्ध हो या न हो, उनकी नीतियां वही रहेंगी।
उन्होंने कहा कि विरोधी पक्ष दो बार कोशिश कर चुका है और नतीजे देख चुका है। उनके अनुसार, अगर वे फिर कोशिश करेंगे तो उन्हें पहले से अलग नतीजा नहीं मिलेगा।
पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (23 अक्टूबर 2026) को कहा था कि वाशिंगटन "एक और छोटा एपिक फ्यूरी" कर सकता है। यह नाम ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के उस सैन्य अभियान के लिए है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम से सबसे तीव्र लड़ाई थम गई थी। इसके बावजूद रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास छिटपुट गोलीबारी होती रही। यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में ऐसी झड़पें कुछ कम हुई हैं।
होर्मुज और नाकेबंदी
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज पर नियंत्रण का दावा करता रहा है। जो जहाज बिना उसकी अनुमति के वहां से गुज़रने की कोशिश करते हैं, उन्हें वह नियमित रूप से निशाना बनाता है। वाशिंगटन और क्षेत्र के कई देश इसका कड़ा विरोध करते हैं। जवाब में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक जवाबी नाकेबंदी बनाए हुए है।
जून में ईरान और अमेरिका स्थायी समझौते की राह तय करने वाले एक सहमति-पत्र पर राज़ी हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में यह समझौता बिखर गया, क्योंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए। द हिंदू के मुताबिक, तेहरान ने तब से संघर्ष खत्म करने के लिए उसी समझौते पर लौटने की मांग की है।
"नई हकीकतें"
अराघची ने कहा कि मौजूदा युद्ध ने सब कुछ बदल दिया है और नई हकीकतों को स्वीकार करना होगा। उनके अनुसार, होर्मुज के रास्ते और उसका प्रबंधन अब पहले जैसे नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शांति और स्थिरता के लिए क्षेत्र को विदेशी सेनाओं की पूरी तरह अनुपस्थिति की ओर बढ़ना होगा।
खाड़ी क्षेत्र के तनाव का असर भारत की उड़ानों पर भी पड़ा है। इस बारे में हमारी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती है।
स्रोत: द हिंदू। फोटो: Mehdi Salehi / Pexels