नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की ओर से गठित स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक आयोग ने सोमवार को जारी नई ग़ाज़ा रिपोर्ट में कहा है कि संघर्षविराम समझौते के बावजूद इज़राइल वहां नरसंहार जारी रखे हुए है। समाचार एजेंसी एपी के हवाले से द हिंदू ने बताया कि रिपोर्ट में वेस्ट बैंक में भी मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। इज़राइल नरसंहार के साथ-साथ यौन हिंसा के आरोपों से भी इनकार करता है और उसने रिपोर्ट आने पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
रिपोर्ट में क्या कहा गया
कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर जांच आयोग के अनुसार इज़राइल ग़ाज़ा में फिलिस्तीनियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करने की मंशा से ऐसे कृत्य जारी रखे हुए है। आयोग ने इज़राइल और उसके सुरक्षा बलों पर ग़ाज़ा और वेस्ट बैंक में युद्ध अपराध तथा मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप भी लगाए हैं।
इनमें यातना, यौन हिंसा और नागरिकों के उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं। आयोग का कहना है कि उसने नवंबर 2023 से जून 2026 के बीच सात मामलों की जांच की, जिनमें इज़राइली बलों के कारण ऐसे फिलिस्तीनियों को शारीरिक नुकसान पहुंचा जो खतरा नहीं लग रहे थे।
संघर्षविराम के बाद के आंकड़े
आयोग के अनुसार अक्टूबर 2025 में संघर्षविराम पर हस्ताक्षर के बाद इज़राइली बलों का नियंत्रण ग़ाज़ा के 53 प्रतिशत हिस्से से बढ़कर कम से कम 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस अवधि में आगे बढ़ते मोर्चे पर इज़राइली गोलीबारी में कम से कम 196 फिलिस्तीनी मारे गए। आयोग के मुताबिक इनमें 18 महिलाएं, 32 लड़के और 11 लड़कियां थीं।
हिरासत में यौन हिंसा के आरोप
आयोग ने कहा कि उसने हाल ही में सदे तेमान सैन्य जेल में ग़ाज़ा के पुरुष बंदियों के खिलाफ इज़राइली गार्डों की यौन हिंसा के छह मामले दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक मामले में गार्डों ने एक फिलिस्तीनी बंदी से दुष्कर्म किया।
रिपोर्ट में अक्टूबर 2023 के बाद हिरासत में रखे गए फिलिस्तीनियों के साथ यौन हिंसा के कई विवरण भी हैं। एपी ने कहा है कि वह इन विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
आगे क्या हो सकता है
आयोग का मकसद अपराधों के आरोपों और सबूतों को बारीकी से दर्ज करना है, ताकि जवाबदेही तय करने में मदद मिले। एपी के अनुसार इसके निष्कर्षों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के अभियोजक या अन्य अधिकार क्षेत्रों में पीड़ितों और उनके परिजनों को न्याय दिलाने के प्रयासों में किया जा सकता है।
युद्ध की पृष्ठभूमि
क्षेत्र में तनाव पर भारत भी चिंता जता चुका है; इस बारे में UNSC में भारत की टिप्पणी हमारी पिछली खबर में पढ़ी जा सकती है।
संघर्षविराम ने उस विनाशकारी युद्ध को कम किया, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले हमलों से शुरू हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार उन हमलों में उग्रवादियों ने 1,200 लोगों की जान ली और 251 को बंधक बनाया। ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इज़राइल की जवाबी कार्रवाई में 74,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।
स्रोत: द हिंदू। फोटो: Mohamed Zarandah / Pexels