अमरावती। चक्रवात अर्नब के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को सतर्क रहने और भारी से अत्यंत भारी बारिश के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार सड़क एवं भवन मंत्री बी.सी. जनार्दन रेड्डी ने भी सड़क सुरक्षा और आपात राहत में कोई बाधा न आने देने को कहा है।
13 जिलों पर असर की आशंका
राज्य सरकार के आकलन के अनुसार चक्रवात का असर 13 जिलों में रहेगा। इन जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। 12 जिलों में 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।
नायडू ने अधिकारियों से कहा है कि बाढ़ की आशंका वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जाए। कमजोर वर्ग के लोगों को इसमें प्राथमिकता देने और आपदा राहत दलों को तैनात करने के लिए भी कहा गया है।
राहत और बचाव के इंतजाम
सरकारी जानकारी के अनुसार 4,711 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि 30,043 मछली पकड़ने वाली नावें सुरक्षित बंदरगाहों पर लौट आई हैं।
सात राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और आठ राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें 11 संवेदनशील जिलों में लगाई जाएंगी। एनटीआर और विशाखापत्तनम जिलों में अतिरिक्त टीमें सुरक्षित रखी जाएंगी। चेतावनी बुलेटिन हर चार घंटे में जारी किए जाएंगे।
फसलों और जलाशयों पर नजर
सरकार ने कटी हुई धान की फसल को बचाने के निर्देश दिए हैं। करीब 1.82 लाख हेक्टेयर में फैली बागवानी फसलों की सुरक्षा और जरूरी वस्तुओं के पर्याप्त भंडार का भी आदेश है।
राज्य के 22 जलाशयों में पानी आने की उम्मीद है। इसके लिए 10 से 12 टीएमसी पानी जमा करने की तैयारी की जा रही है।
सड़कों पर निगरानी
इससे पहले भी चक्रवातों के समय केंद्र और राज्य सरकारें मदद के लिए आगे आई थीं, जिसकी एक मिसाल चक्रवात ‘गज’ से जुड़ी हमारी खबर में दर्ज है।
जनार्दन रेड्डी ने कहा कि सड़क एवं भवन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लक्ष्य किसी की जान न जाने देना है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों की निगरानी रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी के आंकड़ों, उपग्रह तस्वीरों और ड्रोन से की जाएगी।
अधिकारियों से कहा गया है कि बाढ़ की आशंका वाली सड़कों, खतरनाक मोड़ों और कमजोर पुलों की पहले ही पहचान कर लें। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्ते तैयार रखने को भी कहा गया है।
गिरे हुए पेड़ और मलबा हटाने के लिए विशेष दल तैयार रहेंगे। पेड़ काटने की मशीनें और जेसीबी जैसे उपकरण भी मौके पर उपलब्ध रखने होंगे, ताकि यातायात जल्द बहाल हो सके।
छुट्टियां रद्द, राहत शिविरों का निरीक्षण
मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यकारी अभियंता की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। उन्हें जिलाधिकारियों और पुलिस के साथ तालमेल रखने और चक्रवात का असर थमने तक मुख्यालय में रहने को कहा गया है। मंत्री ने चेतावनी दी कि लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
कमजोर रपटों और पुलों पर बैरिकेड लगाने और जरूरत पड़ने पर आवाजाही रोकने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों और सड़क एवं भवन विभाग की इमारतों में बने राहत शिविरों की मजबूती, पीने के पानी और अन्य सुविधाओं की जांच भी कराई जाएगी।
स्रोत: द हिंदू। फोटो: Matt Stone / Pexels