प्रख्यात गांधीवादी चिंतक एवं समाजवादी विचारक रघु ठाकुर की दो पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर राजधानी में लोकतंत्र, पत्रकारिता, सामाजिक न्याय, गांधीवाद और देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर वैचारिक चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने पुस्तकों को वर्तमान समय की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि आज देश और दुनिया में विचारों को दबाने तथा समाप्त करने का प्रयास हो रहा है। गांधीवादी और समाजवादी विचारधारा के स्थान पर नफरत, सांप्रदायिकता और हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवाद का मूल उद्देश्य समानता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछड़े और वंचित वर्गों को आगे लाने के लिए आरक्षण और विशेष अवसर का सिद्धांत आवश्यक है। दुनिया भर में जारी युद्धों और हिंसक संघर्षों का समाधान गांधीवादी विचारधारा में निहित है। उन्होंने रघु ठाकुर की दोनों पुस्तकों को आज के दौर की जरूरत बताते हुए कहा कि इनके लेख समाज को नई दिशा देने की प्रेरणा देते हैं।

हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष एवं गांधीवादी चिंतक लक्ष्मीदास ने कहा कि सामान्यतः व्यक्ति आलोचना तो करता है, लेकिन प्रश्न पूछने और चिंतन करने का साहस नहीं जुटा पाता। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया रेलवे स्टेशन पर हुए अपमानजनक अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसी घटना ने सत्याग्रह की ऐतिहासिक राह तैयार की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डरपोक व्यक्ति अहिंसक नहीं हो सकता। अच्छे उद्देश्य से की गई वैचारिक चर्चा ज्ञान के साथ-साथ समाज की संस्कृति को भी समृद्ध करती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि समस्याओं को उजागर करने वाली पुस्तकें तो बहुत हैं, लेकिन समाधान का रास्ता दिखाने वाली पुस्तकें कम हैं। रघु ठाकुर की दोनों पुस्तकें इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनके लेख प्रासंगिक होने के साथ स्थायी महत्व भी रखते हैं। मीडिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज मीडिया के ब्लड कैंसर को पहचानने की आवश्यकता है। मीडिया संस्थानों की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पेड न्यूज और संस्थागत भ्रष्टाचार ने पत्रकारिता के मूल्यों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया की गिरती साख पर सबसे अधिक चिंता और आत्ममंथन होना चाहिए।
लोकसभा सांसद वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि देश में सच कहने और उसे स्वीकार करने की प्रवृत्ति कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कोरोना वायरस के म्यूटेशन की तुलना मताधिकार और वोट की व्यवस्था में हो रहे कथित बदलावों से करते हुए एसआईआर और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी के मताधिकार को प्रभावित करने वाली कवायद बंद होनी चाहिए। एआई के बढ़ते प्रभाव और रोजगार के सीमित होते अवसरों के कारण युवा वर्ग भी चिंता और अवसाद से गुजर रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार अजय तिवारी ने पुस्तकों को भविष्य के चिंतन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि गंभीर वैचारिक लेखन आने वाली पीढ़ियों को दिशा प्रदान करता है।
लोकतंत्र को बचाने के लिए साहस और नैतिकता जरूरी : रघु ठाकुर
कार्यक्रम के मुख्य केंद्र और दोनों पुस्तकों के लेखक रघु ठाकुर ने देश में लोकतंत्र की मौजूदा परिस्थितियों को चिंताजनक बताते हुए कहा कि आज राजनीति सिद्धांतहीनता के आधार पर चल रही है और पत्रकारिता प्रायोजित होती जा रही है। लोकतंत्र का दायरा लगातार सिकुड़ रहा है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया, वोट की खरीद-फरोख्त और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल मुफ्त सुविधाओं तक सीमित नहीं रह सकता। सरकार आत्मनिर्भरता की बात तो करती है, लेकिन वास्तविक आत्मनिर्भरता का मूल्यांकन भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समाज में भय का वातावरण क्यों बन रहा है, इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। लोकतंत्र को बचाने के लिए साहस, वैचारिक प्रतिबद्धता और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।

देश में चल रहे आंदोलनों का उल्लेख करते हुए ठाकुर ने महात्मा गांधी के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांधी ने जनआंदोलनों की नैतिकता और भाषा की मर्यादा के दो महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए थे। व्यवस्था को गाली-गलौज से नहीं, बल्कि रचनात्मक प्रयासों, संघर्ष और नैतिक मूल्यों से बदला जा सकता है।
उन्होंने अपनी दोनों पुस्तकों पर आलोचनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि आलोचना से विचारों में सुधार और भविष्य में बेहतर लेखन की संभावनाएं पैदा होती हैं।
पुस्तकों की संपादक डॉ. शिवा श्रीवास्तव ने दोनों पुस्तकों की विषयवस्तु और उनकी वैचारिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन अरुण प्रताप सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मदन जैन ने प्रस्तुत किया। आयोजन में मुकेश चंद्रा और अनिता सिंह का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए बुद्धिजीवी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें अजय तिवारी, रमेश शर्मा, राजवीर पंवार, श्याम सुंदर यादव, कर्नल ओ.पी. मलिक, कर्नाटक के मांड्या से आए चिनप्पा, अशोक पंकज, चंद्रप्रकाश, ढाका, सर्वेश कुमार, अजीत त्यागी, सभाजीत सिंह, नवनीत, हरपाल सिंह, अंकित पांडे, रवींद्र और बृजेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल थे।