प्रयागराज में रक्त की कथित खरीद-फरोख्त और शोषणकारी नेटवर्क की जांच की मांग; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज
आर्थिक तंगी के चलते प्रयागराज में विद्यार्थियों द्वारा कोचिंग फीस और जीवनयापन का खर्च जुटाने के लिए खून बेचने का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने गंभीर चिंता जताई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम तथा दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कानूनी एवं मानवाधिकार विभाग के चेयरमैन एडवोकेट सुनील कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि देश का युवा बेहतर भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज जैसे शैक्षणिक केंद्रों का रुख करता है, लेकिन आर्थिक अभाव में उसे अपना खून बेचने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकार को गरीब विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, सस्ती कोचिंग, हॉस्टल और आवासीय सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।
एक राष्ट्रीय समाचार पत्र के स्टिंग ऑपरेशन में ब्लड बैंकों, अस्पतालों और बिचौलियों के कथित गठजोड़ का खुलासा होने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
एडवोकेट सुनील कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर रक्त की खरीद-फरोख्त करना गंभीर मामला है। आयोग से जिम्मेदार संस्थाओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया गया है।
शिकायत में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश देकर प्रयागराज में कथित रैकेट की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने तथा प्रयागराज सहित अन्य शहरों में ऐसी घटनाओं की पड़ताल के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने की मांग की गई है। समिति से विद्यार्थियों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन कर छात्रवृत्ति, किफायती कोचिंग और आवास सहायता संबंधी प्रभावी योजनाओं की सिफारिश करने का आग्रह भी किया गया है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कानूनी एवं मानवाधिकार विभाग के महासचिव एडवोकेट हरीश गोला ने बताया कि शिकायत का उद्देश्य विद्यार्थियों के मानवाधिकारों की रक्षा, शोषण पर रोक और रक्त की कथित अवैध खरीद-फरोख्त की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
प्रतिनिधिमंडल में काउंसिल ऑफ दिल्ली के मानद सचिव एडवोकेट रमित सहरावत, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रीपक कंसल, एआईसीसी अनुसूचित विभाग की राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर एडवोकेट मेघा सेहरा, एडवोकेट साजिद चौधरी, पुनीत मिश्रा, अखिलेश विक्रम शुक्ला, कफील अहमद, प्रखर दीक्षित, सबा खान, हरीश अहमद मिनहाज, निकीश कुमारी, एम. सफदर इमाम, सतीश सोलंकी, निष्कर्ष गुप्ता, जैद शेख, प्रतीक मोहन सिन्हा, दीपक पायलट, विकास आनंद सिंह, आर. रमेश, ईशान मिश्रा, राजेश टांक, अंशुल शर्मा, आदिश जैन, विशेष तोमर, योगेश शर्मा, विवेक कुमार और ए.बी. पांडेय सहित अनेक अधिवक्ता शामिल रहे।
अधिवक्ताओं ने कहा कि शिक्षा हर युवा का अधिकार है और आर्थिक अभाव किसी विद्यार्थी को स्वास्थ्य एवं जीवन जोखिम में डालने के लिए विवश नहीं करना चाहिए।