
शंकर स्वरूप शर्मा
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, प्रखर समाजवादी विचारक, कुशल संगठनकर्ता, श्रमिकों के सच्चे हमदर्द और राजधानी के विकास की मजबूत नींव रखने वाले श्री बृजमोहन जी की 100वीं जन्मजयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक युग, विचारधारा और जनसेवा की परंपरा को नमन करने का ऐतिहासिक क्षण है, जिसने भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पावन अवसर पर हम उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन, असाधारण नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को कृतज्ञतापूर्वक याद करते हैं।


श्री बृजमोहन जी ऐसे जननेता थे, जिनकी राजनीति सत्ता और पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अधिकार पहुंचाने का संकल्प थी। उनके व्यक्तित्व में विचारों की दृढ़ता, व्यवहार में सादगी, निर्णयों में दूरदर्शिता और जनसरोकारों के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती थी। वे केवल राजनीतिक संगठन के नेता नहीं थे, बल्कि संस्थाओं के निर्माता, युवाओं के प्रेरणास्रोत और श्रमिक वर्ग की आवाज थे। उनके लिए राजनीति का वास्तविक अर्थ जनता के बीच रहकर उसकी समस्याओं का समाधान करना था।
पंडित नेहरू के विचारों से मिली प्रेरणा
पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के प्रगतिशील, आधुनिक और दूरदर्शी विचारों से प्रभावित श्री बृजमोहन जी ने अपने राजनीतिक जीवन को समाजवादी मूल्यों, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति समर्पित किया। वे प्रधान मंत्री पंडित नेहरू के विश्वासपात्र और प्रिय सहयोगियों में गिने जाते थे। नेहरू जी के आधुनिक भारत के निर्माण के स्वप्न को उन्होंने केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संगठन और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से उसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया।
उनका मानना था कि देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब समाज के कमजोर वर्गों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और वंचित समुदायों को विकास की मुख्यधारा में समान अवसर प्राप्त हों। यही कारण था कि उनके राजनीतिक चिंतन में सामाजिक समानता और आर्थिक न्याय को विशेष स्थान प्राप्त था।


युवा कांग्रेस को नई ऊर्जा, प्रदेश कांग्रेस को नई पहचान
श्री बृजमोहन जी का राजनीतिक जीवन युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की भावना से ओतप्रोत था। यूथ कांग्रेस के नेतृत्व के दौरान उन्होंने युवाओं में राजनीतिक चेतना, संगठनात्मक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का कार्य किया। वे युवाओं को केवल राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित नहीं करते थे, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संदेश भी देते थे।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को नई ऊर्जा, दिशा और राजनीतिक पहचान प्रदान की। उस दौर में दिल्ली तेजी से बदल रही थी। राजधानी का विस्तार हो रहा था, नई बस्तियां विकसित हो रही थीं और नागरिक सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही थी। ऐसे समय में संगठन को मजबूत बनाना और जनता के बीच कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी ढंग से पहुंचाना आसान कार्य नहीं था। बृजमोहन शर्मा ने अपने नेतृत्व, राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से इस चुनौती का सामना किया।


उनकी कार्यशैली में कार्यकर्ताओं का सम्मान, वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन और युवाओं को आगे बढ़ाने की भावना प्रमुख थी। वे संगठन को व्यक्तियों के बजाय विचारों और सामूहिक प्रयासों के आधार पर मजबूत बनाने में विश्वास रखते थे।
दिल्ली नगर निगम का स्वर्णिम अध्याय : विकास की मजबूत नींव
वर्ष 1962 से 1967 के दौरान दिल्ली नगर निगम के चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल राजधानी के प्रशासनिक और शहरी विकास के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उस समय दिल्ली आज की तरह विस्तृत महानगर नहीं बनी थी। तेजी से बढ़ती आबादी, नागरिक सुविधाओं की कमी, सफाई व्यवस्था, सड़कों, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और शहरी प्रशासन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं।
श्री बृजमोहन जी ने इन समस्याओं को केवल प्रशासनिक विषय नहीं माना, बल्कि उन्हें राजधानी के भविष्य और आम नागरिक के जीवन से जोड़कर देखा। उनकी प्राथमिकता दिल्ली को एक व्यवस्थित, स्वच्छ, सुविधायुक्त और बेहतर नागरिक जीवन वाला शहर बनाने की थी।


उनके नेतृत्व का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह था कि वे शहरी प्रशासन को जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित करने के पक्षधर थे। उनका कार्यकाल उस दौर की दिल्ली के विकास की आधारशिला मजबूत करने वाले अध्यायों में स्मरण किया जाता है। दिल्ली के संस्थागत विकास और नागरिक प्रशासन की चर्चा में उनका योगदान सदैव सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए।
पत्रकारिता और श्रमिक आंदोलन में भी निभाई ऐतिहासिक भूमिका
आदरणीय श्री बृजमोहन जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि निष्पक्ष पत्रकारिता के महत्व को समझने वाले जागरूक पत्रकार भी थे। वे मानते थे कि पत्रकारिता लोकतंत्र का सशक्त प्रहरी है और उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा जनहित के प्रति प्रतिबद्धता में निहित है।
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के शीर्ष मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने देश के श्रमिकों और कामगारों के अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की। मजदूरों के सम्मानजनक जीवन, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर कार्य परिस्थितियों और श्रम अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उल्लेखनीय रही।
उनके लिए श्रमिक केवल आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के वास्तविक शिल्पकार थे। वे इस बात पर जोर देते थे कि जिस देश के मजदूर का जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक नहीं है, उस देश की आर्थिक प्रगति अधूरी है। उन्होंने श्रमिक संगठनों को मजबूत बनाने और कामगारों की समस्याओं को राजनीतिक एवं सामाजिक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास किया।
पद से बड़ा था व्यक्तित्व, राजनीति से बड़ा था जनसेवा का संकल्प
श्री बृजमोहन जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने पद और प्रतिष्ठा को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उनके लिए जनसेवा सर्वोपरि थी। वे अपने सहयोगियों और कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संबंध रखते थे। वरिष्ठों के प्रति सम्मान और कनिष्ठों के प्रति स्नेह उनके स्वभाव का अभिन्न हिस्सा था।
वे उन नेताओं में थे, जिनकी पहचान केवल उनके राजनीतिक पदों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित आदर्शों और लोगों के जीवन पर छोड़ी गई सकारात्मक छाप से बनती है। उनका जीवन बताता है कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता न करे और समाज के हितों को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर रखे।
100वीं जन्मजयंती : नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अवसर
आज जब हम बड़े भाई समान श्री बृजमोहन जी की 100वीं जन्मजयंती मना रहे हैं, तब उनके जीवन और विचारों का महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जब सिद्धांतों, वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक अनुशासन और जनसेवा की राजनीति पर लगातार चर्चा होती है, तब श्री बृजमोहन जी जैसे नेताओं का जीवन नई पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत बनता है।

उनकी जन्मशताब्दी केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके विचारों और मूल्यों को वर्तमान समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प भी होना चाहिए। उनके नाम पर सामाजिक और श्रमिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रम, युवाओं के लिए वैचारिक एवं नेतृत्व प्रशिक्षण, पत्रकारिता के मूल्यों पर संवाद तथा दिल्ली के विकास में उनके योगदान पर शोध और दस्तावेजीकरण जैसे प्रयास उनकी स्मृति को स्थायी सम्मान प्रदान कर सकते हैं।
इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहती। उनके विचार, संघर्ष और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं। श्री बृजमोहन जी भी ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया, संगठन को शक्ति दी, श्रमिकों को आवाज दी और राजधानी के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी अडिग ईमानदारी, नेहरूवादी विचारधारा के प्रति निष्ठा, श्रमिकों के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेंगे।
100वीं जन्मजयंती पर महान जननेता आदरणीय श्री बृजमोहन जी को शत-शत नमन!
उनका जीवन एक संदेश देता है—नेतृत्व पद से नहीं, कर्म से बड़ा होता है; राजनीति सत्ता से नहीं, सेवा से सार्थक होती है और इतिहास उन्हीं लोगों को याद रखता है, जो अपने लिए नहीं, समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं।