नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई सितंबर महीने में बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में यह दर 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं और ईंधन व बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी को इस उछाल की प्रमुख वजह बताया गया है।
खाद्य और ईंधन में तेज बढ़त
आंकड़ों के मुताबिक खाद्य सूचकांक में महंगाई सितंबर में 8.66 प्रतिशत दर्ज की गई। अगस्त में यही आंकड़ा 7.05 प्रतिशत था। यानी एक महीने के भीतर खाने-पीने की चीजों के थोक दाम में बढ़ोतरी की रफ्तार और तेज हुई है।
ईंधन और बिजली की श्रेणी में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई सबसे ऊंचे स्तर पर रही। सितंबर में यह 25.85 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 22.93 प्रतिशत थी।
विनिर्मित वस्तुओं में श्रृंखला का उच्चतम स्तर
विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में थोक महंगाई 9.76 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इस श्रृंखला का सबसे ऊंचा स्तर है। अगस्त में यह 8.37 प्रतिशत थी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि सितंबर 2026 में कई समूह महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारक रहे। इनमें पेट्रोलियम उत्पादों वाले खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कोयला और लिग्नाइट शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार मूल धातुओं, रसायन और रासायनिक उत्पादों, कपड़ा, रबर व प्लास्टिक उत्पादों तथा बिजली उपकरणों के विनिर्माण ने भी इसमें योगदान दिया।
पश्चिम एशिया संकट का असर
रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही थोक मूल्य सूचकांक लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध और उसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और उर्वरकों की लागत बढ़ा दी है। भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है, इसलिए इसका असर खाद्य और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखा है।
खुदरा महंगाई और रिजर्व बैंक का कदम
इसी सप्ताह जारी आंकड़ों में खुदरा महंगाई भी सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 23 महीनों का उच्चतम स्तर है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.83 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार खुदरा स्तर पर भी खाद्य कीमतों में तेज उछाल इसकी मुख्य वजह रहा।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले सप्ताह प्रमुख नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद यह दर 5.50 प्रतिशत हो गई है। थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर बढ़ती महंगाई के बीच अब नजर इस पर रहेगी कि आने वाले महीनों में कीमतों का रुख किस दिशा में जाता है।
पृष्ठभूमि
थोक मूल्य सूचकांक उत्पादकों और थोक बाजार के स्तर पर कीमतों में बदलाव को मापता है। पहले भी थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जैसा कि नवंबर में खुदरा और थोक महंगाई में गिरावट से जुड़ी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था।
स्रोत: The Hindu। फोटो: Aravind P.S / Pexels