वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रूस प्रतिबंध और शुल्कों के एक नए पैकेज को लागू होने से दो दिन पहले ही रोक दिया। ये उपाय रूस के ऊर्जा राजस्व को निशाना बनाने के लिए तैयार किए गए थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को इस फैसले को ‘ऐतिहासिक क्षण’ बताया।
क्या है ग्राहम एक्ट
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, लिंडसे ग्राहम एक्ट का नाम उस दिवंगत अमेरिकी सीनेटर के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यह विधेयक पेश किया था। यह कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ पुतिन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाता था।
अमेरिकी मीडिया संस्थानों CNBC और ABC News की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के आदेश से रूसी सामान पर अतिरिक्त 500 प्रतिशत शुल्क और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों से आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क जैसे प्रावधान स्थगित हो गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, रूसी वित्तीय संस्थानों, निवेश और ऊर्जा लेनदेन से जुड़ी नई पाबंदियां भी इस छूट के दायरे में आती हैं।
राष्ट्रीय हित का हवाला
रिपोर्टों के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति को छूट देने की अनुमति देता है, बशर्ते वे यह तय करें कि ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। ट्रंप ने लिखा कि उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस को प्रमाणपत्र सौंप दिया है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यह आदेश पहले से लागू प्रतिबंधों को नहीं हटाता। हालांकि, इससे प्रशासन को यह तय करने में अधिक छूट मिल गई है कि आगे कौन से प्रतिबंध बनाए रखे जाएं।
रूस ने किया स्वागत
दिमित्रीव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्राहम एक्ट का निलंबन एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। उनके अनुसार, यह कानून सबसे पहले अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों को गंभीर नुकसान पहुंचाता।
The Hindu के अनुसार, क्रेमलिन और पुतिन की ओर से इस कदम पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुतिन शुक्रवार को सैन्य वर्दी में दिखाई दिए थे और उन्होंने कहा था कि मॉस्को पूर्वी यूक्रेन के बाकी हिस्से पर भी कब्जा करना चाहता है।
यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ऐसे समय आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ ट्रंप का टकराव चल रहा है। इस टकराव के बाद यह अटकलें तेज हुई हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति मॉस्को के पक्ष की ओर झुक रहे हैं।
रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था, जिसके बाद पश्चिमी देशों ने उस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग पांच साल से जारी इस युद्ध में लाखों लोगों की जान गई है और इससे कहीं अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, जहां रूसी दूत ने इस फैसले की सराहना की है, वहीं अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसकी आलोचना की है।
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स्रोत: The Hindu। फोटो: Ali Mucci / Pexels