खेल खेल में हुनरबाज बन रहे हैं मासूम बच्चे

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यहां प्रतिभा के रूप में विकसित हो रही है बच्चों की शरारत

नई दिल्ली। उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एंड चाइल्ड डवलपमेंट द्वारा आयोजित बाल रंगमंच एवं व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण शिविरों में बच्चों की शरारत उनकी प्रतिभा के रूप में विकसित हो रही है। इन शिविरों में बच्चे खेल खेल में हुनरबाज बन रहे हैं और इन शिविरों में बिताये जाने वाले लम्हें बच्चों के लिये यादगार हो गये है।


बाल रंगमंच की दिशा में वर्षो से कार्यरत देश की प्रख्यात संस्था उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एंड चाइल्ड डवलपमेंट द्वारा नेशनल स्कूल आफ ड्रामा की तर्ज पर ग्रीष्मावाकाश में अनेक स्थानों पर बाल रंगमंच प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाता है। संस्था के निदेशक संजय टुटेजा के निर्देशन में वर्ष राजधनी दिल्ली के विभिन्न स्थानों रोहिणी, द्वारका, विकासपुरी, द्वारका मोड़ व उत्तर प्रदेश के सहारनपुर सहित कुल 10 स्थानों पर 18 मई से 25 जून तक बाल रंगमंच प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन संस्था की ओर से किया गया है। इन शिविरों में लगभग 400 बच्चे खेल खेल में अपने व्यक्तित्व का निर्माण तो कर ही रहे हैं साथ ही अपनी शरारतों को भी नई दिशा दे रहे है।
इन शिविरों में राष्ट्रीय नाटय विद्यालय से प्रशिक्षत प्रशिक्षकों के साथ साथ कला, संस्कृति के विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को रंगमंच की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण देने के साथ साथ उनके वयक्तित्व को संवारा जा रहा है और राष्ट्र व समाज के लिये उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में भाग ले रही 14 वर्षीय सभ्या व 6 वर्षीय राध्या बताती हैं कि इस शिविर में आकर उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी हुई है। 6 वर्ष की कान्या, भानूजा, निहांशी, अविका, व कृष्व बताते हैं कि कक्षा में आकर वह स्टेज पर अभिनय करना सीख गये हैं और उन्हें अब मंच पर कोई घबराहट नहीं होती।


उड़ान—द सेंटर आफ थियेटर आर्ट एंड चाइल्ड डवलपमेंट के निदेशक संजय टुटेजा बताते हैं कि इन शिविरों में खेल खेल में बच्चो की मौलिक प्रतिभा का विकास किया जाता है और उन्हें मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चों पर कापी किताब का कोई बोझ नहीं दिया जाता बल्कि रचनातम्कता के माध्यम से उनके हुनर को पंख देने के साथ साथ उन्हें नवाचार के प्रति प्रेरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक संस्था लगभग एक लाख से अधिक बच्चों को इस तरह का प्रशिक्षण दे चुकी है और इन शिविरों से प्रशिक्षित बच्चे ना केवल फिल्मों व टीवी धारावाहिकों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे है।

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