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सात दिन सिनेमा में डूबा रहा दिल्ली शहर आईएफएफडी के भव्य समापन पर रेखा गुप्ता और कपिल मिश्रा के लिए खूब बजी तालिया

rashtratimesnewspaper April 1, 2026 1 min read
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  • चंद्र मोहन शर्मा

भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली का समापन कार्यक्रम बहुत ही भव्य और दर्शको की रिकॉर्ड मौजूदगी के साथ इस वादे के साथ समाप्त हुआ कि अगले वर्ष इस समारोह को दिल्ली के सिंगल स्क्रीन सिनेमाओं तक लेकर जाया जाएगा यह समरोह एक भव्य ‘नाइट ऑफ़ ऑनर्स’ के साथ अपने निर्णायक शिखर पर पहुँचा, जिसने सिनेमा, संस्कृति और उत्सव को एक ही मंच पर एक साथ ला दिया। इस शाम का माहौल बेहद गरिमामय था, जिसकी शोभा मुख्य अतिथि – दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल  तरनजीत सिंह संधू; विशिष्ट अतिथि – दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमति रेखा गुप्ता; माननीय पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा; और डीटीटीडीसी के एमडी व सीईओ तथा महोत्सव निदेशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की उपस्थिति ने बढ़ाई। यह उपस्थिति उस भव्यता और उद्देश्य को दर्शाती थी जो दिल्ली की सांस्कृतिक गाथा को आकार देने वाले इस महोत्सव के पीछे निहित

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “दिल्ली देश का हृदय है। एक ऐसा शहर जो हर किसी को अपनाता है और अपने भीतर इतिहास व आशा, दोनों को समेटे हुए है। इस फिल्म महोत्सव के माध्यम से, हम न केवल एक कार्यक्रम की मेज़बानी कर रहे हैं, बल्कि राजधानी के लिए एक नई सांस्कृतिक पहचान भी गढ़ रहे हैं। सिनेमा में लोगों को प्रेरित करने, उन्हें आपस में जोड़ने और ऐसी कहानियाँ सुनाने की अद्भुत शक्ति होती है।

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, “आईएफएफडी की परिकल्पना सर्वप्रथम पिछले वर्ष बजट चर्चाओं के दौरान की गई थी, और माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कुशल नेतृत्व में इसे साकार रूप दिया।

उपराज्यपाल ने कहा, “यह महोत्सव दिल्ली की निरंतर विकसित होती सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है ।

नाइट ऑफ़ ऑनर्स’ समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ, और फिर दीप प्रज्वलन और औपचारिक संबोधन हुए; इस तरह एक ऐसा माहौल बना जिसमें परंपरा और उत्सव का सुंदर संतुलन था। जैसे-जैसे शाम आगे बढ़ी, अनुपम खेर ने सिनेमा को एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि दी, जिसने दर्शकों को एक दुर्लभ शांति में डुबो दिया; वहीं रिकी केज के संगीत ने माहौल को और भी शानदार बना दिया, और एक ज़ोरदार समापन प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का अंत हुआ।

 फेस्टिवल डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा और आईएफएफडी प्रीव्यू कमेटी के चेयरपर्सन सुनीत टंडन को सम्मानित किया गया, साथ ही सिंगापुर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के प्रतिनिधिमंडल को भी विशेष रूप से सराहा गया। एनरिक आर्से सहित अन्य वैश्विक हस्तियों की मौजूदगी ने फेस्टिवल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को और भी मज़बूत किया; वहीं ‘शोले’ के 50 साल पूरे होने के मौके पर रमेश सिप्पी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस शाम ‘एआई फ़िल्ममेकिंग हैकाथॉन’ के ज़रिए सिनेमा के उभरते हुए नए स्वरूपों पर भी रोशनी डाली गई, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया गया और विजेता फ़िल्म को प्रदर्शित किया गया। ‘कैपिटल्स प्राइड’ श्रेणी के तहत गुनीत मोंगा, टी. पी. अग्रवाल और दिव्या दत्ता को सम्मानित किया गया; वहीं भूमि पेडनेकर को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ उनके कार्यों के लिए ‘एक्टर विद अ मिशन’ के रूप में सराहा गया।शाम के कार्यक्रम में कई तरह के सम्मान दिए गए, जिनमें कहानी कहने, अभिनय, निर्देशन और सांस्कृतिक योगदान के क्षेत्र में सिनेमाई उत्कृष्टता को सराहा गया।

फिल्मों से जुड़े मुख्य सम्मानों में ’सैयारा’ (यश राज फिल्म्स, मोहित सूरी द्वारा निर्देशित) को ’साल की सबसे अलग फिल्म’ (पाथब्रेकिंग फिल्म ऑफ द ईयर) का खिताब मिला; ’सितारे ज़मीन पर’ (आर. एस. प्रसन्ना द्वारा निर्देशित) को ’साल की सबसे प्रेरणादायक फिल्म’ (मोस्ट इंस्पायरिंग फिल्म ऑफ द ईयर) चुना गया; और ’तन्वी द ग्रेट’ को ’सर्वश्रेष्ठ निर्देशन’ (अनुपम खेर) और ’सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता’ (शुभांगी दत्त) के लिए पहचान मिली। ’धुरंधर’ (जियो स्टूडियोज़) को ’पीवीआर बेस्ट ऑफ 2025’ श्रेणी में सम्मानित किया गया, जिसमें रणवीर सिंह को ’सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ और आदित्य धर को ’सर्वश्रेष्ठ निर्देशक’ का पुरस्कार मिला।  ’लोकमाइस महोत्सव का बौद्धिक और रचनात्मक माहौल काफी जीवंत रहा, जिसमें खचाखच भरे सत्रों में दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

दिव्या दत्ता ने कहा, “ओटीटी ने ऐसी कहानियों के लिए जगह बनाई है जो बिल्कुल सच्ची लगती है। अनुपम खेर की मास्टरक्लास दिन के सबसे प्रभावशाली सत्रों में से एक साबित हुई, जो उनके अभिनय कौशल और उनकी निजी जीवन-यात्रा की एक गहन पड़ताल बन गई। 

भूमि पेडनेकर ने फ़ेस्टिवल की बातचीत में एक बेबाक और ज़मीनी आवाज़ जोड़ी, और फ़िल्म स्कूल से निकाले जाने से लेकर यश राज फ़िल्म्स में कास्टिंग असिस्टेंट के तौर पर शुरुआत करने तक के अपने अनोखे सफ़र पर बात की।  चीफ़ मैनेजिंग एडिटर, सोनल कालरा द्वारा मॉडरेट किए गए इस सेशन में लचीलेपन, मैनिफ़ेस्टेशन, और सार्थक सिनेमा को बनाए रखने में क्रिएटर्स और दर्शकों की साझा ज़िम्मेदारी पर चर्चा हुई।

भूमि पेडनेकर ने कहा, “सिनेमा तब आगे बढ़ता है जब दर्शक सिर्फ़ बड़ी फ़िल्मों का ही नहीं, बल्कि सच्ची कहानियों का भी समर्थन करते है। बनाए रख सकते हैं।”

जहाँ भारत मंडपम के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में युवा मूवी लवर्स ने काजल अग्रवाल अभिनीत ‘नेने राजू नेने मंत्री’ ने राजनीतिक ड्रामा को खूब सराहा ।अक्षरा सिंह के नेतृत्व वाली भोजपुरी कहानियों ने दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया, और जिमी शेरगिल अभिनीत ‘माँ जाए’ ने बँटवारे और पहचान की एक बहुआयामी कहानी पेश की। ‘शोले’ की स्क्रीनिंग के लिए दर्शकों का लगातार उमड़ना, दर्शकों के साथ इस फ़िल्म के सदाबहार जुड़ाव को और मज़बूत करता है।

दिन के सिनेमाई माहौल को और बढ़ाते हुए, चाणक्य सिनेमा में ‘धुरंधर 2’ की एक स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित की गई  जगाई और फ़ेस्टिवल की पहुँच को

भूपेश गुप्ता के अनुसार भारत की कहानियों का अनुभव किया;  तक सीमित नहीं थी;

उत्सव के समापन कार्यक्रम में कहानी कहने के अंदाज़ और बातचीत का एक बेहतरीन मेल देखने को मिला। भारत मंडपम और शहर के अलग-अलग स्थानों पर दिखाई गई फ़िल्मों की विविध श्रृंखला से लेकर समापन फ़िल्म ’अमीबा’ तक, यह दिन भव्यता और समापन, दोनों का प्रतीक था।  गुनीत मोंगा और टैन सियू के नेतृत्व में हुए सत्रों, और राकेश ओमप्रकाश मेहरा व इम्तियाज़ अली के बीच हुई एक विशेष बातचीत को सभी ने सराहा।

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