- उमेश जोशी
बीते वित्त वर्ष (2025-26) में देश के ऑटोमोबाइल बाजार ने नई रफ्तार पकड़ी है, जहां कुल थोक बिक्री में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी ऑटोमोबाइल उद्योग की अच्छी सेहत दर्शाती है। हालांकि इस तेज़ी की असली कमान दुपहिया वाहनों ने संभाली है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी मांग के दम पर दुपहिया सेगमेंट न केवल सबसे आगे निकला, बल्कि पूरे ऑटो सेक्टर की रफ्तार तय करने वाला प्रमुख इंजन बनकर उभरा है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की ताज़ा तस्वीर से साफ संकेत मिलता है कि इस साल की बढ़ौती सिर्फ आंकड़ों का करिश्मा नहीं है, बल्कि वास्तविक बदलाव है जो वाहनों की मांग बढ़ने की वजह से आया है।
यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, तिपहिया और दुपहिया—सभी श्रेणियों ने पिछले सात सालों में अपनी सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है, लेकिन दुपहिया वाहनों का प्रदर्शन सबसे दमदार रहा।
इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारक गाँवों में लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति रही है। बेहतर फसल के कारण सालों की आमदनी बढ़ी है; सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को मिल रहा है; इतना ही नहीं, लाभकारी योजनाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल कंपनियां आसान किस्तों पर वाहन खरीदने की सुविधा मुहैया करा रही हैं। आसान वित्तीय विकल्पों के कारण छोटे शहरों और गाँवों में दुपहिया वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कम कीमत, कम मेंटेनेंस और बेहतर माइलेज के कारण दुपहिया वाहन आम उपभोक्ता की पहली पसंद बना हुआ है।
नीतिगत स्तर पर भी इस तेजी को मजबूत समर्थन मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती है। इससे ऑटो लोन सस्ते हुए। नतीजतन, बैंक से कर्ज लेकर वाहन खरीदने वालों, खासतौर से दुपहिया खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ा फायदा मिला। साथ ही, आयकर छूट की सीमा बढ़ने से लोगों के हाथ में अतिरिक्त आय आई, जिसने उपभोग को अपना जीवन स्तर बेहतर बनाने का अवसर दिया।
दुपहिया सेगमेंट की इस मजबूती का असर पूरे ऑटो सेक्टर पर दिखाई दिया। बढ़ती मांग ने कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने और नए मॉडल लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी ने इस सेगमेंट को और अधिक गतिशील बना दिया है। कम जीएसटी दर और सस्ते ‘ग्रीन लोन’ के कारण अब इलेक्ट्रिक स्कूटर आम उपभोक्ता की पहुँच में आ रहे हैं।
हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता झुकाव भी बाजार की दिशा बदल रहा है, लेकिन, फिलहाल सबसे बड़ा योगदान दुपहिया वाहनों का ही है, जो किफायती परिवहन का सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं।
इसी के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और उत्पादन में बढ़ते निवेश ने भविष्य की संभावनाओं को और मजबूत किया है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक सुविधाओं का फैलाव यह संकेत देता है कि ऑटो सेक्टर की यह रफ्तार आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर, वित्तीय रियायतों, मजबूत मांग और सकारात्मक नीतिगत माहौल के बीच दुपहिया वाहनों की अगुआई में ऑटोमोबाइल क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है—जहां विकास की रफ्तार भी है और बदलाव की स्पष्ट दिशा भी।