- रणदीप सुरजेवाला, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मजबूत रणनीति बनी जीत का आधार
कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बीजेपी को करारी शिकस्त दी है। बागलकोट और दावणगेरे साउथ सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की बड़ी जीत ने यह साबित कर दिया कि राज्य में कांग्रेस का संगठनात्मक मॉडल और जमीनी रणनीति लगातार मजबूत हो रही है। बागलकोट सीट पर कांग्रेस ने लगभग 23 हजार वोटों तथा दावणगेरे साउथ में करीब 6 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तथा कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच मजबूत तालमेल इस जीत की सबसे बड़ी वजह रहा। लंबे समय से इन नेताओं के बीच मतभेद की खबरें फैलाने की कोशिश की जाती रही, लेकिन उपचुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस नेतृत्व पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ मैदान में काम कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार पिछले दो महीनों से रणदीप सुरजेवाला, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार लगातार इन क्षेत्रों में सक्रिय रहे। नेताओं ने होटल और सरकारी व्यवस्थाओं के बजाय कार्यकर्ताओं के घरों में रुककर संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया तथा सीधे जनता से संवाद स्थापित किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने इस जीत को “कर्नाटक मॉडल” की सफलता बताया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने जनता से किए गए पांचों प्रमुख गारंटी वादों को जमीन पर लागू किया, जिससे लोगों का भरोसा कांग्रेस पर और मजबूत हुआ। महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीब वर्गों के लिए चलाई गई योजनाओं का सीधा असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया।
वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदू-मुस्लिम राजनीति को मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने विकास, कामकाज और जनहित की नीतियों को प्राथमिकता दी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कर्नाटक में कांग्रेस की यह रणनीति आने वाले 2028 विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा संकेत है। मजबूत संगठन, जमीनी पकड़ और नेतृत्व के सामूहिक प्रयासों ने कांग्रेस को नई ऊर्जा प्रदान की है।
कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि “कर्नाटक मॉडल” अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन रहा है, जहां नेता जनता के बीच रहकर काम कर रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय बनाया जा रहा है।