नई दिल्ली/गुवाहाटी। असम की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को 2026 विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा है। कभी 16 विधायकों के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाली पार्टी अब महज 2 सीटों तक सिमट गई है। यह परिणाम केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि पार्टी की रणनीति, नेतृत्व शैली और जनसंपर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
AIUDF का विधानसभा सफर कभी तेजी से उभरते राजनीतिक ग्राफ का प्रतीक माना जाता था। वर्ष 2006 में 10 सीटों से शुरुआत करने वाली पार्टी ने 2011 में 18 सीटें जीतकर बड़ी ताकत का रूप लिया। 2016 में 13 सीटें और 2021 में 16 सीटें हासिल कर AIUDF ने असम की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। लेकिन 2026 के चुनाव में पार्टी का ग्राफ अचानक गिरकर केवल 2 सीटों तक पहुंच गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की राजनीति, विवादित बयानों और पार्टी की छवि को लेकर जनता में बनी नकारात्मक धारणा ने AIUDF को भारी नुकसान पहुंचाया। मंचों से धार्मिक नारों और कट्टर छवि वाले भाषणों ने विरोधियों को पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने का मौका दिया। वहीं, पार्टी से जुड़े कुछ विवादित चेहरों और वायरल वीडियो ने भी मतदाताओं के बीच नकारात्मक असर छोड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी, स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा और विकास, शिक्षा, रोजगार जैसे मुद्दों से दूरी भी पार्टी की गिरावट के बड़े कारण बने। कई क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मतदाताओं का भरोसा कमजोर पड़ता दिखाई दिया।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि AIUDF को अब अपनी रणनीति और प्राथमिकताओं पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा। केवल पहचान आधारित राजनीति के बजाय जनहित, विकास और सकारात्मक एजेंडे पर फोकस करना पार्टी के लिए जरूरी माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यदि पार्टी आने वाले समय में जमीनी संगठन को मजबूत करने, युवाओं को नेतृत्व में अवसर देने और सकारात्मक छवि बनाने की दिशा में काम करती है, तभी वह अपना खोया जनाधार वापस पाने में सफल हो सकती है।
AIUDF का “16 से 2” तक का यह सफर असम की राजनीति में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि लोकतंत्र में केवल भावनात्मक मुद्दे नहीं, बल्कि जनविश्वास, विकास और संतुलित नेतृत्व ही स्थायी सफलता दिलाते हैं।