नई दिल्ली। के. एस. चीमा ग्रुप की इकाई डिजिट्रूस प्राइवेट लिमिटेड ने मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में “मिशन स्वक्षम” का औपचारिक शुभारंभ किया। कंपनी के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल भारत की साइबर तथा औद्योगिक संप्रभुता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान मानी जा रही है।


“स्वावलंबन से सक्षम (From Self-Reliance to Capability)” विषय पर आधारित मिशन स्वक्षम का उद्देश्य सरकार, सशस्त्र बलों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों तथा पूर्व सैनिकों को एक साझा मंच पर लाकर देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं रक्षा-औद्योगिक तंत्र के लिए स्वदेशी साइबर और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) क्षमताओं का विकास करना है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सामरिक साइबर लचीलापन संवाद (National Dialogue on Strategic Cyber Resilience) तथा “हाइब्रिड युद्ध के युग में भारत की महत्वपूर्ण अवसंरचना और रक्षा-औद्योगिक आधार की सुरक्षा” विषय पर एक उच्चस्तरीय रणनीतिक मंथन आयोजित किया गया, जिसका संचालन एयर वाइस मार्शल (डॉ.) देवेश वत्स, वीएसएम ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएम, एडीसी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्वदेशी तकनीकी क्षमताएं भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविक तकनीकी संप्रभुता तभी संभव है जब हार्डवेयर, फर्मवेयर, सॉफ्टवेयर, परीक्षण प्रणालियों और संपूर्ण तकनीकी जीवनचक्र का विकास स्वदेशी स्तर पर हो।
उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स, एमएसएमई और तकनीकी कंपनियों द्वारा विकसित समाधानों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की सुरक्षा और युद्ध प्रणाली के निर्णायक तत्व बनेंगे।


कार्यक्रम में एचसीएलटेक के सॉवरेन एआई बिजनेस प्रमुख संदीप सैनी ने स्वदेशी सेमीकंडक्टर विकास, भारत आधारित सॉवरेन एआई तथा रक्षा-स्तरीय तकनीकी प्रतिभा निर्माण को उद्योग जगत की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। वहीं नीति आयोग में ओएसडी (साइबर) लेफ्टिनेंट कर्नल अमरिंदर सिंह ने साइबर खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
आईआईटी गांधीनगर के प्रो. सोमनाथ मित्रा ने साइबर सुरक्षा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए दीर्घकालिक निवेश और विषय-आधारित निवेश कोष स्थापित करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व सैनिकों का नेतृत्व, अनुशासन और तकनीकी अनुभव साइबर सुरक्षा, विनिर्माण और राष्ट्रीय तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस अवसर पर तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया—
- DTroop – भारत का पहला स्वदेशी एआई-संचालित ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (OT-SOC) प्लेटफॉर्म।
- मिशन स्वक्षम का प्रथम श्वेतपत्र (White Paper)।
- राष्ट्रीय सामरिक साइबर लचीलापन संवाद की स्थापना, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष किया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की अगली रणनीतिक छलांग स्वदेशी साइबर, एआई और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी क्षमताओं के विकास एवं व्यापक उपयोग पर आधारित होगी। मिशन स्वक्षम इस दिशा में एक राष्ट्रीय मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा, “भविष्य केवल उन देशों का नहीं होगा जो तकनीक बनाते हैं, बल्कि उन देशों का होगा जो उस तकनीक के स्वामी हैं, उसे सुरक्षित रखते हैं, उसका विस्तार करते हैं और उस पर भरोसा करते हैं।”