नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए वर्षों तक एक सुनियोजित अभियान चलाया गया। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों पर राहुल गांधी की मुखर भूमिका के कारण उनके खिलाफ नकारात्मक नैरेटिव तैयार किया गया।
पोस्ट के अनुसार वर्ष 2011 का भट्टा-पारसौल किसान आंदोलन और वर्ष 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून दो ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम थे, जिन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक पहचान को नई दिशा दी। दावा किया गया है कि भट्टा-पारसौल आंदोलन में किसानों के समर्थन में मैदान में उतरकर राहुल गांधी ने उनकी आवाज बुलंद की, जबकि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के माध्यम से किसानों को बेहतर मुआवजा और अधिकार सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
वायरल पोस्ट में कहा गया है कि इन घटनाओं के बाद कुछ राजनीतिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका हुई, जिसके चलते राहुल गांधी के खिलाफ एक व्यवस्थित प्रचार अभियान शुरू किया गया। इसमें तथाकथित तौर पर सोशल मीडिया, राजनीतिक प्रचार तंत्र और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए उन्हें “पप्पू” के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2014 के बाद यह अभियान और अधिक तेज हुआ तथा राहुल गांधी की सार्वजनिक छवि को प्रभावित करने के लिए लगातार नकारात्मक संदेश प्रसारित किए गए। समर्थकों का मानना है कि यह एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक विमर्श का सामान्य हिस्सा बताते हैं।