वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सिविल सेवक मुनीश कुमार गौड़ ने युवा पीढ़ी, विशेषकर Gen Z, को संबोधित एक खुले पत्र में कहा है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और उनका जोश तभी सार्थक है जब उसके साथ विवेक, अनुशासन और जिम्मेदारी भी जुड़ी हो।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल, चरित्र और निरंतर परिश्रम ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन में शामिल होने से पहले युवाओं को उसके तथ्यों, उद्देश्यों और संभावित परिणामों को समझना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग युवाओं को आंदोलनों के लिए प्रेरित करते हैं, क्या वे उनके भविष्य और कानूनी परिणामों की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं?
श्री गौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और कानून हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं हो सकता। इतिहास बताता है कि ऐसे हालात में सबसे अधिक नुकसान युवाओं को ही उठाना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनों के आयोजकों का दायित्व केवल लोगों को एकत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें संयमित और अनुशासित बनाए रखना भी है। आयोजकों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि प्रदर्शन के मुद्दों से जुड़े लोग शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखें। यदि किसी प्रदर्शन के उग्र होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है या अप्रिय परिणाम सामने आते हैं, तो उसकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी आयोजकों पर भी बनती है।
उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वायरल पोस्ट और उत्तेजक भाषणों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय तथ्यों की जांच करना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनें।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक दल, संगठन, नेता या अभिनेता से अधिक मूल्यवान है। राष्ट्र निर्माण शिक्षित, अनुशासित और उत्तरदायी नागरिकों से होता है, इसलिए युवाओं को सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।