संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय से पूछा है कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की स्थिति पर पाकिस्तान से जवाब मांगने वाली रिपोर्ट कब जारी करेगा। भारत ने पीओके में हत्याओं की जांच और इंटरनेट पर पाबंदियों जैसे मुद्दों का हवाला दिया। यह बयान बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त के साथ संवाद के दौरान दिया गया।
भारत का सवाल
भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत की ओर से यह बयान दिया। उन्होंने मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) और उच्चायुक्त के पीओके पर दिए गए विस्तृत बयानों का जिक्र किया। उन बयानों में सशस्त्र बलों और सुरक्षा बलों के हाथों हुई हत्याओं की त्वरित, गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
स्वरूप के अनुसार उन बयानों में ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के हिरासत में लिए गए नेताओं को कानूनी मदद और परिवार से मिलने की सुविधा देने, उचित प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई की मांग भी की गई थी। साथ ही पूरे पीओके में इंटरनेट पर लगी पाबंदियां हटाने और स्थानीय आबादी की शिकायतों पर सार्थक राजनीतिक संवाद का आग्रह किया गया था।
स्वरूप ने पूछा कि OHCHR से पाकिस्तान सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट की उम्मीद कब की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने भीतर झांककर देखना चाहिए कि खैबर पख्तूनख्वा सहित उसके बड़े हिस्से और उसके ‘अवैध कब्जे’ वाले रावलकोट में ये अधिकार कैसे नहीं मिल रहे।
जुलाई में उच्चायुक्त की अपील
इस साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने पीओके में क्षेत्रीय चुनावों से पहले फैली अशांति के बीच शांति की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव से पहले जून से दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, जिनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी और कुछ सुरक्षाकर्मी थे। उन्होंने सभी मौतों की निष्पक्ष जांच और पूरे क्षेत्र में इंटरनेट बहाल करने की मांग की थी।
‘चयनात्मक रवैये’ का आरोप
स्वरूप ने कहा कि OHCHR का रवैया ‘अत्यधिक चयनात्मक’ है। उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोस और पश्चिमी देशों में प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की गई, और ऐसे दोहरे मापदंड बहुपक्षीय व्यवस्था और OHCHR के काम में भरोसा कम करते हैं।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व वाला भारत का स्वतंत्रता आंदोलन अहिंसा और समानता पर आधारित था, जिसने संविधान को आकार दिया। उनके अनुसार भारतीय नागरिक सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के दायरे में अधिकारों का प्रयोग करते हैं, कानून प्रवर्तन एजेंसियां कानून के अनुसार काम करती हैं और शिकायतों के निवारण के लिए अदालतें उपलब्ध हैं।
स्वरूप ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और वहां के लोगों को संविधान वही मौलिक अधिकार देता है, जो देश के अन्य क्षेत्रों को मिले हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद के सदस्य के रूप में भारत बिना चयनात्मकता और दोहरे मापदंड के OHCHR के साथ भरोसे और साझेदारी की भावना से काम करता रहेगा।
दिल्ली प्रदर्शनों पर टिप्पणी के बाद आया बयान
भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले नई दिल्ली ने राष्ट्रीय राजधानी में हुए प्रदर्शनों पर OHCHR की टिप्पणियों को आंतरिक मामलों में ‘अनुचित’ और ‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’ बताया था। पिछले सप्ताह उच्चायुक्त कार्यालय ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, नेताओं, वकीलों और पत्रकारों की कथित सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई थी। भारत की विदेश नीति से जुड़ी अन्य खबरों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता ‘लैंडिंग पॉइंट’ की ओर रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।
स्रोत: द हिंदू। फोटो: Hugo Magalhaes / Pexels