नई दिल्ली। प्रख्यात समाजसेवी एवं वरिष्ठ चिंतक श्री गोपाल रसिक की धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती राधा रसिक की प्रथम जयंती श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दिल्ली के मालीवाड़ा चौक स्थित श्री बालू केशरी मंदिर में धार्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजसेवियों, गणमान्य नागरिकों, धार्मिक नेताओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर स्वर्गीय राधा रसिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष पूजा-अर्चना, हवन एवं प्रार्थना सभा से हुआ। श्रद्धालुओं ने स्वर्गीय राधा रसिक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्श जीवन, सेवा भावना और मानवीय मूल्यों को याद किया। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता एवं जनसेवा से जुड़े कार्य भी किए गए, जो स्वर्गीय राधा रसिक के जीवन दर्शन के अनुरूप रहे।
समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एम. रत्न बोहरा, श्री सत्येंद्र जैन, श्री अशोक त्यागी, महंत श्री गिरिराज गोस्वामी, पंडित श्री राम वल्लभ जी सहित अनेक प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी वक्ताओं ने राधा रसिक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, करुणा, संस्कार और सामाजिक समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण था।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में प्रेम, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने के लिए राधा रसिक द्वारा प्रदर्शित मूल्यों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके आदर्श सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

इस अवसर पर विभिन्न दुर्घटनाओं एवं असामयिक निधन के शिकार लोगों की आत्मा की शांति तथा उनके परिजनों के सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए भी विशेष प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम के अंत में श्री गोपाल रसिक ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर्गीय राधा रसिक की स्मृति में सेवा और सद्भाव के कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। उपस्थित सभी लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर स्वर्गीय राधा रसिक की पावन स्मृति को नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।