नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने राजधानी को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “डी.आर.ओ.पी.” (Develop Responsible Outlook for Plastic) परियोजना का शुभारंभ किया। एनडीएमसी के उपाध्यक्ष श्री कुलजीत सिंह चहल ने किआ इंडिया एवं इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की।
इस अवसर पर श्री चहल ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक अपशिष्ट से निर्मित डी.आर.ओ.पी. सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया तथा प्लास्टिक कचरा संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की एक व्यवस्थित व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ हो गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एनडीएमसी क्षेत्र स्थित वाल्मीकि बस्ती से की गई थी। उन्होंने कहा कि संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और विदेशी दूतावासों वाले एनडीएमसी क्षेत्र में शुरू की गई हर स्वच्छता पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे सार्थक प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव बनते हैं।
श्री चहल ने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से आईपीसीए के सहयोग से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। इस साझेदारी के अंतर्गत अब तक 115 एरोबिन स्थापित किए गए हैं, 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया है तथा 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट का उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि डी.आर.ओ.पी. परियोजना के माध्यम से पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में विशेष प्लास्टिक संग्रहण डिब्बे लगाए जाएंगे, जिससे प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, परिवहन और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एनडीएमसी परिषद सदस्य श्री अनिल वाल्मीकि ने किआ इंडिया और आईपीसीए की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना राजधानी के हृदय स्थल नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा है तथा इसके समाधान के लिए जन-जागरूकता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सेल्स एवं मार्केटिंग) श्री अतुल सूद ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरी भारत में टिकाऊ और संगठित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किआ इंडिया जिम्मेदार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने और व्यवहारगत परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, आईपीसीए के सचिव श्री अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने परियोजना की कार्यप्रणाली, संभावित प्रभाव और इसे देश के अन्य शहरों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में एनडीएमसी परिषद सदस्य, आरडब्ल्यूए, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल नई दिल्ली के निर्माण के संकल्प को दोहराया।
प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. को स्वच्छ भारत मिशन, मिशन लाइफ (LiFE) और विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी।