अदालत ने कहा— चुनावी प्रक्रिया के बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकते; नटराजन के पास अब सिर्फ इलेक्शन पिटीशन का विकल्प
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस को तगड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका लगा है। देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने नामांकन पत्र को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने साफ किया है कि स्थापित संवैधानिक नियमों के तहत वह जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना (या संबंधित वेकेशन बेंच) की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालती दखल की गुंजाइश सीमित है। अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को यह छूट दी है कि वह चुनाव संपन्न होने के बाद नियमों के तहत हाई कोर्ट में ‘इलेक्शन पिटीशन’ (चुनाव याचिका) दायर कर सकती हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर (RO) अरविंद शर्मा ने रद्द कर दिया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत में लंबित निजी आपराधिक शिकायत से जुड़ी जानकारी छिपाई है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद पाया कि नटराजन का हलफनामा अपूर्ण था, क्योंकि उन्हें उक्त मामले में समन जारी हो चुका था और उन्होंने वहां लिखित जवाब भी दाखिल किया था, जिसकी जानकारी फॉर्म 26 में नहीं दी गई।
कांग्रेस और नटराजन की दलील
मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह कोई ऐसा गंभीर आपराधिक मामला नहीं है जिसमें आरोप (Charges) तय हो चुके हों। यह महज एक निजी शिकायत (Private Complaint) थी और रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट (RPA) की धारा 33A के तहत इसे घोषित करना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को ‘दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक’ बताया। नटराजन ने कहा, “यह कानूनी शिकस्त नहीं, बल्कि लोकतंत्र को कुचलने की राजनीतिक साजिश है।”
बीजेपी की तीनों सीटें पक्की
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने और सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के बाद मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर भी पेंच खत्म हो गया है। सूबे की तीन सीटों में से दो पर भाजपा की जीत पहले से तय थी, लेकिन संख्या बल कम होने के बावजूद कांग्रेस ने नटराजन को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया था। अब नटराजन के बाहर होने से भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है।
इस पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस ने हार के डर से जानबूझकर अपने फॉर्म में कमियां छोड़ी थीं, जबकि कांग्रेस इस पूरी कार्रवाई को संवैधानिक मर्यादाओं का हनन बता रही है।
प्रमुख बिंदु (In-Brief Box for Newspaper):
मामला: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ याचिका।
अदालत का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लौटाई (खारिज की), कहा— प्रक्रिया के बीच में दखल नहीं देंगे।
कारण: हैदराबाद की एक अदालत में लंबित शिकायत की जानकारी नामांकन पत्र (फॉर्म 26) में न देने का आरोप।
राजनीतिक असर: मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट भी बिना मुकाबले के भाजपा के खाते में जाना तय।