ललितमोहन बंसल
लास एंजल्स : भारत के भागवत कथावाचकों में अग्रणी ठाकुर पंडित कृष्णचन्द्र शास्त्री ने कनाडा और अमेरिका के एक माह के दौरे में यहां भागवत कथा में कहा कि आनंद सर्वोच ईश्वरीय भक्ति है। इसका कोई विकल्प नहीं है। इसके लिए मनुष्य को प्रत्येक अवस्था में आनंदित रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस समय भक्तिकाल चल रहा है।
कनाडा और अमेरिका की तीस दिवसीय यात्रा के अपने दूसरे पड़ाव में ठाकुर कृष्णचंद्र ने लास एंजल्स के पासाडेना हिंदू मंदिर में भागवत कथा के पहले दिन ईश्वरीय आनंद की चर्चा करते हुए कहा कि खानपान और भाँति भाँति के व्यंजनों का सेवन जिव्हा का स्वाद मात्र है। परमात्मा सर्वत्र है. मनुष्य को मनसा, वाचा और कर्म से होने वाले पाप से बचना चाहिए। उन्होंने पाप से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पाप की सजा भुगतने से बच पाना मुश्किल है। दिनभर की बरसात के बावजूद मंदिर में ठाकुर जी की कथा सुनने के लिए सैकड़ों सनातनी मौजूद थे। मंदिर के पदाधिकारियों में डाक्टर निर्मल कुमार, डाक्टर मंजू कुमार, सुश्री रीमा, श्री ओझा और मंदिर के पुजारी जगदीश राजगौर ने पूरे आदरभाव से ठाकुर कृष्ण चन्द्र की आरती उतारी। इससे पूर्व भारतीय परिधान में इक्कीस महिलाओं ने कलशयात्रा निकाली. ठाकुर कृष्णचंद्र ने अगुआई की। उन्होंने निर्माणाधीन पासाडेना हिंदू मंदिर निर्माण में अधिकाधिक सहयोग देने की अपील भी की.
ठाकुर कृष्ण चंद्र ने कथा के दिन तेजी से हुई बरसात को शुभ बताया और ‘राधे राधे,गोविंद राधे के संकीर्तन के साथ भगवत की पहले दिन की कथा की शुरुआत की. 76 वर्षीय ठाकुर कृष्णचन्द्र देश-विदेश में पिछले 52 वर्षों में 1600 भागवत कथाए कर चुके है. वह पिछले तीन दशक से लगातार कनाडा और अमेरिका के विभिन्न मंदिरों और सभास्थलों में भागवत कथा करते आ रहे हैं.
कथा के पहले दिन की शुरुआत में उन्होंने कहा कि भगवान सत्, चित, आनंद है, वह सर्वत्र है. भगवान निर्गुण है इसलिए सगुण है. तत्पश्चात उन्होंने पहले दिन की कथा में शुकदेवजी के धरती पर आने, अमरनाथ में शिवजी से मदभागवत की चोरी से कथा सुनने, नेमीशरण्य में शौनक आदि ऋषियों से सूत जी के मिलने और सूत जी से छह प्रश्न पूछने कीb कथा कहीं. वह सोमवार को इन छह प्राणों की चर्चा करेंगे.
उन्होंने बिहार की शिक्षा दीक्षा और इसके महामात्य की विशेष रूप से चर्चा की उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, इस प्रदेश ने देश को बड़ी संख्या में आई ए एस प्रदान किए हैं, जो सरकार के उच्च पदों पर आसीन हैं.