स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन-धड़कनों की तरह हिन्दुस्तान सबके दिल में है- दिनेश रघुवंशी

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स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन श्रीराम सेंटर सभागार, सफ़दर हाशमी मार्ग, निकट मंडी हाउस, नई दिल्ली में किया गया।

इस अवसर पर सचिव, कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग श्री सी.आर.गर्ग विशिष्ट अतिथि थे। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि पंडित सुरेश नीरव द्वारा की गई।

हिन्दी अकादमी, दिल्ली के सचिव संजय कुमार गर्ग ने अपने सम्बोधन में सभी कवियों, अतिथियों और काव्य-प्रेमियों का स्वागत करते हुए 77वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने हिन्दी अकादमी की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अकादमी निरन्तर हिन्दी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार विभिन्न आयोजनों के माध्यम से दिल्ली के प्रत्येक क्षेत्र में कर रही है।

 

जाने-माने कवि दिनेश रघुवंशी के संचालन में हुए इस कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री भावना तिवारी की सरस्वती-वंदना *मात शारदे ऐसा वर दे/चहुँ दिश गूँजे जय कल्याणी* इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में काव्य-प्रेमी श्रोता-दर्शक उपस्थित थे।

दिनेश रघुवंशी ने देश की एकता-अखंडता को समर्पित अपने काव्य-पाठ में पढ़ा- *तीन रंगों का यहाँ सम्मान सबके दिल में है/देश की ख़ातिर जीयें अरमान सबके दिल में है/कौन कर सकता है हमको एक दूजे से अलग/धड़कनों की तरह हिन्दुस्तान सबके दिल में है।* ओज के प्रसिद्ध कवि डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने पढ़ा- *भारत के विश्व विजयी रथ को, कर विश्व विजय ही मोड़ेंगे/हम अमर तिरंगा दुनिया में, फिर से फहराने निकल पड़े।* बरसात के मौसम में लोग जहाँ एक ओर लुत्फ़ लेते हैं वहीं ग़रीब मजदूर की बेबसी पर केंद्रित अपने शे’र में आलोक यादव ने पढ़ा- *उससे पूछो जिसकी मज़दूरी छूटी/काँटों का है बिस्तर मौसम बारिश का।* मशहूर शायर दीक्षित दनकौरी ने कवि की रचना के महत्त्व को रेखांकित करते हुए अपने एक शे’र में पढ़ा- *मेरी ग़ज़ल या नज़्म, रुबाई सब मिट्टी/तुझ तक ही जब पहुँच न पाई, सब मिट्टी।*

कवयित्री रामेश्वरी नादान ने सोशल मीडिया से उपजी संबंधों के बीच बढ़ रही दूरियों को केन्द्रित रचना में पढ़ा- *किसी के होंठों की मुस्कुराहट बनकर तो देखिए/ऑनलाइन दुनिया में ऑफलाइन रिश्ते निभाकर तो देखिए/हंस उठेंगी इंतज़ार करती हुई बूढ़ी आँखें/कुछ पल उनके साथ बिताकर तो देखिए*

अपने अध्यक्षीय काव्य-पाठ में पंडित सुरेश नीरव ने पढ़ा- *जो उगा लेते हैं सूरज अपने ही दालान में/वो पराई चाँदनी के आसरे रहते नहीं।*

इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में डॉ. गोविन्द व्यास, विनय कुमार विनम्र, डॉ. गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’, महेश कुमार गर्ग, ज्योति त्रिपाठी और पापुलर मेरठी ने अपने काव्य-पाठ में समाज और राष्ट्र में व्याप्त कुरीतियों और विसंगतियों पर प्रहार करते हुए राष्ट्र के नव निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत मे हिन्दी अकादमी के सचिव श्री संजय कुमार गर्ग ने सभी अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त l

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